कविता : खुद को पहचानो....
फिजूल बेकार की बातों को
मानने में लगे हो
कौन भला कौन बुरा है क्यों ये
जानने में लगे हो ?
इस बात को जरा
ध्यानपूर्वक मानो
दूसरों को जानने के बजाए
खुद को पहचानो
जब अपने अंदर सूक्ष्म
तरीके से दिख पाओगे
ये जीवन वास्तव में क्या है ?
खुद ही जान जाओगे
ये जीवन वास्तव में क्या है ?
खुद ही जान जाओगे.......
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X