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कविता : हरकत....

                
                                                         
                            हास्य कविता : हरकत....
                                                                 
                            
प्रिय तुम ने सात फेरे
मुझ से लगाई
बीबी बन कर तुम
मेरे घर आई

मगर सुनने में आया तुम्हारा
किसी के घर आना जाना है
मेरे अनुपस्थिति में वहीं उसके
घर पर तुम्हारा खाना है

देखो ऐसी खिचड़ी
ना पकाया करो
उसके घर यूं ही ना
तुम जाया करो

अड़ोस पड़ोस गली में मेरी
भी तो थोड़ी इज्जत है
तुम्हारी ये हरकत से देखो
कितनी बड़ी बेइज्जत है ?
तुम्हारी ये हरकत से देखो
कितनी बड़ी बेइज्जत है.......?

 
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3 महीने पहले

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