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ये स्वार्थ की दुनिया है

                
                                                         
                            ये स्वार्थ की दुनिया है।
                                                                 
                            
साहब! यहाँ इन्सानों की तो बस्ती है।
पर लोग
यहाँ भगवान को भी आजमा लेते है।
फिर
आपकी और हमारी तो क्या हस्ती है।
यहाँ
कुत्ते महंगे, और इंसानियत सस्ती है।
यहाँ कुत्ते को तो कार में घुमा लेते है।
और भूखे इन्सान को भीख माँगते
देखकर कार का शीशा, चढ़ा लेते है।
यहाँ बिना,
स्वार्थ के कोई बात ही नहीं करते है।
भूखे को दो रोटी,
देके उनका भी वीडियो बना लेते है।

 
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3 महीने पहले

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