भारतीय विरासत की आखिरी पीढ़ी के पन्ने।
हाथ में लाठी,
तन पर धोती, कुर्ता और सिर पर है साफे की शान।
मुँह पर देते वे मूंछों का ताव और मधुर सी मुस्कान।
ये हैं हमारी विरासत की आखिरी पीढ़ी की पहचान।
ये पीढ़ी आने वाले आखिरी दस
पन्द्रह वर्षों में संसार से विदा होने वाली है।
हे! मेरे देश के नई पीढ़ी के
नौजवानों संभालो अपनी इस विरासत को।
अब पुरानी पीढ़ी के संस्कारों
की जननी अब हमे छोड़ कर जाने वाली है।
ये पुरानी वो विरासत है जो हमेशा जल्दी
उठने वाली और जल्दी रात को सोने वाली।
खेत खलिहानों में कड़ी मेहनत करने वाली।
पशु पालकर शुद्ध
दूध, दही और घी की, नदियाँ बहाने वाली।
जिन्होंने देश की आजादी का दौर देखा।
जिन्होंने भयंकर बाढ़ और अकाल सहे।
तो कभी,
भयानक बीमारी और महामारियाँ सही।
जिन्होंने है हम
सबको पढ़ा लिखा इस काबिल बनाया।
और देश की हर कठिन,
परिस्थितियों में हमारा वो साथ निभाया।
आज ये विरासत के आखिरी पन्ने अब
हमारी,
जीवन रूपी किताब से विदा होने को है।
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