तू आदि हैं...
तू अंत है...
तू ब्रह्मांड में अनंत हैं...
खंड-खंड अखंड तू ...
विश्वनाथ प्रचंड है...
है शीश पर तेरे गंगा धार...
जो करे भव से पार...
हार हार जीत तू...
मन का हैं मनमीत तू ...
अनंत तेरी माया हैं...
दुखियारो की छाया है...
प्रेम का उगम है तू ...
भक्ति का संगम है तू...
तू दया का सागर है ...
तुझसे जग उजागर है...
वंदनीय, पूजनीय है तू सबसे माननीय...
नियति के खेल से परे है तू सम्मानीय...
तू राग है...
अनुराग है...
शीतल तू ही आग है...
तू शूल शूल धारी है...
तू नंदी की सवारी है ...
तू ईश ईश ईश है ...
तू जग का जगदीश है..
तू जटाधार अभयंकर ...
रूद्र सा रुद्रश्वर...
तू नील नील नीलांग है...
तू भस्म लगाए भस्मांग है..
तू चंद्र चंद्रशेखर ...
तू राज राजेश्वर...
तू हर हर महादेव ....
तू देवों के देव देवाधिदेव...
तू वास करें कैलाश में...
तू भक्त के श्वास श्वास में....
-नेहा राजपूत
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