मिलती नहीं मोहब्बत यहां कभी रोने से
फर्क नहीं पड़ता किसी को पलकें भिगोने से
कैद ना कर खुद को ग़मों से मुक्त करले
मावी मोती बिन माला ना बने धागा पिरोने से
तू होश में आ कौआ से खुद को हँस बना ले
मोहब्बत बिकती है यहाँ चांदी और सोने से
हाथी घोड़े बाराती देखे गाय गधे की शादी में
एतराज़ नहीं यहां किसी को लम्बें और बौने से
-नीटू मावी
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