कृष्ण मिलते नहीं मैं लाख पुकारूं
पाप धुलते नहीं सो बार निखारू
कैसे ये जीवन दर्पण बनेगा
है बेकार जीवन मैं कैसे सुधारू 2
तुम नाही मिलो तो सपनों में आओ
मेरी इतनी सी चाह मोहे अपनो बनाओ
मोहे चढ़ गयो है रंग हरि नाम का
कोई दे दो पता मोहे घनश्याम का 2
मथुरा की रहो को मैं छान लूंगा
तुझे देखा नहीं पर पहचान लूंगा
मेरा नश्वर शरीर तेरे दर्शन को तरशा
मैं जीवन नहीं तेरा दर मांग लूंगा
मैं तो हूं मोहन तेरा दीवाना
अगला जन्म हो मथुरा बरसाना
जीव बनाइयों चाहे पशु पखेरू
वृक्ष बनाइयो होय यमुना किनारा
मेरा दिल ना लगे मेरी धड़कन बढ़ी है
ना कोई उपाय बस श्यामा जड़ी है
मुझे बूटी नहीं मुझे माधव ही चाहिए
ना जीने की चाहत ये अंतिम घड़ी है 2
-नीटू मावी
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