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अनमोल जवानी

                
                                                         
                            के रुक जा जरा ठहर तो सही
                                                                 
                            
मैने तुझमे ख्वाब पिरोए है

कुछ होने दे अभी अरमां पूरे
मैने कितने पलक भिगोए है

अचानक ना निकल ए जवानी
मैने वर्षों तक तुझे पाला है

ऐसे ना रूठ ए जाने बहार
तुझे बालक की तरहा संभला है

अठरा वर्ष देखा तुझे मुकाम की तरहा
मेरे पास आ मुझसे लिपट
दूर से ना निकल गुम नाम की तरहा

तेरे बिना तन फटा अंगरखा
सूखी डाली जैसे ना हो बरखा

ए जवानी मुझे पे यकीन तो कर
किसी को तेरी खबर नहीं लगने दूंगा

सीने से लगा लूं ताबीज की तरहा
नज़र कोई तुझे ना लगने दूंगा
-नीटू मावी
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2 महीने पहले

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