के मिल जा मुझे तू एक बार
मैं रोना चाहता हूं
फिर एक बार पलकों को
आंसुओं की बारिश में
भिगोना चाहता हूं
मेरी आखिरी ख्वाहिश है
किसी भी कीमत के बदले
तेरे पैरों पर सर रख कर
मैं सोना चाहता हूं
भूल कर दुनिया दारी को
फिर तेरी पुरानी यादों में
मैं खोना चाहता हूं
मेरी कश्ती किनारे पर डूबे भले
तुम हां तो करो
मैं तुम्हारा बोझ ढोना चाहता हूं
मेरी वफ़ा के बदले तेरी बगावत भी मंजूर
मेरी जुल्मी मोहब्बत
मैं तेरा होना चाहता हूं
-नीटू मावी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X