भीगी रात तुम्हारे साथ,
जो बात हुई मेरी,
उसी बात में जुड़ गए
मेरे कुछ जज़्बात तुमसे।
अब निभानी है तुम्हारी हर बात,
बताओ, मैं क्या करूँ
उस सौगात का
जो तुमने मुझे दिया है।
ये कैसा करिश्मा हुआ तुमसे,
कि तुम मेरी ज़िंदगी में आईं
और मेरी दुनिया ही बदल गई,
तुम मेरी महबूबा बन गईं।
देखा था एक सपना—
ज़मीन पर बैठकर
आसमान में उड़ने का,
और न जाने कैसे
एक पल में
मैंने उसे सच कर दिखाया।
मेरा हर सपना
अब सच हो रहा है,
जब से तुम
मेरे जीवन में आई हो।
अब जो कुछ भी मेरा है,
उसमें कुछ न कुछ
तुमसे जुड़ा है,
और जो तुमसे जुड़ा है,
वही मुझे
अपना सा लगता है।
-नीलम चौरसिया "नील"
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