आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

लोग मुझसे पूछते हैं!

                
                                                         
                            काम के लिए कार्यालय
                                                                 
                            
सबसे पहले आते हैं
और देर शाम
सबसे अंत में जाते हैं...
बिना किसी से खुद मिले,
और खुद बात किए बगैर!

मैं कहता हूँ!
जिन सभी लोगों को देखता हूँ,
वे मेरे बहुत करीबी हैं,
शब्दों से उन्हें तौल नहीं सकते।

दिन भर काम के ख्यालों में
खोया रहता हूँ,
यह सोचकर कि...
कहीं किसी का दिल न दुखा दे
कोई मेरा शब्द!
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर