उम्र के ख़याल को मन से निकाल दो
गर सपने जिन्दा हैं तो तुम जवान हो!
हो हुनरमंद मुश्क़िलों में मुस्कुराने के
तो बे-शक तुम जिन्दादिल इन्सान हो!
वय अवस्था उम्र आयु तो बे-मानी है
बस इक होंसला तुम्हारी पहचान हो!
शिद्दत के साथ किरदार निभाते रहो
तुम कहानी और किरदार की शान हो!
-एन. आर. कस्वाँ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X