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मुस्तक़बिल

                
                                                         
                            ज़रूरत से ज्यादा बाइबिल और कुरान समझने लगता है
                                                                 
                            
मज़हब कोही अपना दीन धर्म और ईमान समझने लगता है!
हाथों के हुनर से बड़ी जब हाथों की लकीरें नज़र आती हैं
मुफ़लिसी को मुस्तक़बिल अपना इन्सान समझने लगता है!
-एन आर कस्वाँ
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2 महीने पहले

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