हताशा निराशा आती जाती रहती हैं
आशा की किरण बुझनी नहीं चाहिए !
मजबूत टूटकर भी जारी रखते सफ़र
मुसाफ़िरत कभी रुकनी नहीं चाहिए !
-एन. आर. कस्वाँ
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