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जीनेकी आरज़ू

                
                                                         
                            मसला सिर्फ़ येह नहीं है कि उमर गुज़र गई है
                                                                 
                            
सवाल येह है के जीनेकी आरज़ू अब शुरू हुई है
वक़्त के साथ-साथ हम किस क़दर बदल गए हैं
हयात पहले भी यही थी हयात आज भी वही है
-एन. आर. कस्वाँ
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2 महीने पहले

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