ऐसा नहीं है के आप बद से बदतर ही सोच सकते हो
आप अच्छा से अच्छा और बेहतर भी सोच सकते हो
पामाल रस्ते पर ही सफ़र किया जाए यह ज़रूरी नहीं
आप अपने लिए कोई अलग डगर भी सोच सकते हो
गर आसाँ नहीं चलना अकेले हयात की मुसाफ़िरत में
साथ अपने कोई हमनवां हमसफ़र भी सोच सकते हो
-एन. आर. कस्वाँ
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