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अपना मकान

                
                                                         
                            हरगिज़ नहीं मंज़ूर हम को किसी के महल का दरबान बनकर रहना
                                                                 
                            
इससे बेहतर है अपने खुदके कच्चे मकान का सुल्तान बनकर रहना
-एन आर कस्वाँ
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