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भटका हुआ मन

                
                                                         
                            ये बातें ये वादे ये दरिया किनारा
                                                                 
                            
ये भटका हुआ मन
उलझा हुआ डूबा हुआ
पल पल बदलते हैं सपने यहां
रोता हुआ सोता हुआ
ख्यालों में जागा है रात और दिन
भाग रहा ठहरा नहीं
खोज रहा जो मिला ही नहीं
कैसी दशा कैसा हुआ
यादों में जिसके पागल हुआ
खोता गया पाया नहीं
इक क्षण जीवन हंसा ही नहीं
ना अपना मिला ना दूजा मिला
अपनों से जैसे पराया हुआ
ये मौसम ये पर्वत ये नदियों की धारा
ये भटका हुआ मन
सोच रहा हूं दौड़ रहा हूं
खुशियों की बगिया ढूंढ रहा हूं
मिले थोडा सुकून जिसमें
करे काम वो भी किए जा रहा हूं
ये बातें ये वादे ये दरिया किनारा
ये भटका हुआ मन
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3 महीने पहले

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