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क्या हम सब गूंगे हैं

                
                                                         
                            आज सब लोग सिर्फ अपने पर केन्द्रित है,
                                                                 
                            
अपना छोटा सा परिवार,किन्तु आय पर केन्द्रित है
मियां- बीबी दोनो नौकरी करतें हैं
तब ले दे के चलता है गुजारा
और तो नहीं है सहारा
यह स्थिति है बड़े शहरों की
अगल- बगल से कोई नहीं दुआ- सलाम
यहां का माहौल ऐसा नहीं कोई किसीको करे सलाम
छोटे शहर और गांव में ऐसी स्थिति नहीं
आपस में जान- पहचान होती ही है
दुआ- सलाम भी होती ही है
बड़े शहरों से स्थिति बहुत बेहतर है
पर मुझे ऐसा लगता है कि
हम गूंगे होते जा रहे हैं
दूसरों से बात ही करना चाह रहें हैं
इसका मतलब, क्या हम गूंगे हैं
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2 महीने पहले

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