बचपन की यादे
क्या मस्ती थी?
क्या दोस्ती थी?
खेत खलियानों में
क्या मटरगस्ती थी?
न उदासी थी,
न तनाव था,
बस खेलना ही एक काम था।
न मंजिल, न सपना
न टीबी, न मोबाइल
कितना अच्छा था बचपना?
दादा दादी का प्यार था।
माता पिता का डर था।
मास्टर जी का छड़ी था।
भाई बहन का झगडा था।
तरह तरह के खेलते खेल,
कभी बन जाते रेल,
घघो रानी की अलग कहानी,
कित कित निकले सबकी जुवानी।
रात कब, सुबह कब
पता चला बचपन बीता जब
वह भी क्या समय था?
यह भी क्या समय है?
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