आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शीर्षक - मेरे अपने..... वहम

                
                                                         
                            शीर्षक -मेरे अपने...... वहम
                                                                 
                            
**********************
मेरे अपने न कोई बस तुम हम हैं।
न तेरा न मेरा निःस्वार्थ रहते हैं।
जीवन के सच मृत्यु जवां देखी है।
मेरे अपने पराए सब हम जानते हैं।
धन और संपत्ति की सोच रखते हैं।
रिश्ते नाते न मेरे अपने समय होता हैं।
नीरज मेरे अपने का सच लिखते हैं।
एक-दूसरे को ज्ञान और सच कहते हैं।
सच तो वो ही न खुद अपने हो पाएं है।
हां मेरे अपने ही बस अपने में समेटे है।
मेरे अपने अपनी सोच अहम रखते हैं।
न एहसास न कोई परिभाषा समझते हैं।
मेरे अपने ही दुःख खुशी बस चाहते हैं।
न तेरा विश्वास और विचार हम करते हैं।
सच बस यही तो आज मेरे अपने होते हैं।
आओ हम सोच बदल अकेले ही चलते हैं।
-नीरज कुमार अग्रवाल 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर