जीवन के सच हम जानते हैं।
कर्म फल भोग हम जानते हैं।
हर एक शब्द को हम जानते हैं।
जिंदगी में सब हम जानते हैं।
नीरज शब्द लिखें हम जानते हैं।
हां हां मन भाव हम जानते हैं।
कविता कहानी लेख शब्द होते हैं।
शब्दों के साथ सच हम जानते हैं।
हां बस छल फरेब स्वार्थ रखते हैं।
कर्म फल व्यवस्था हम जानते हैं।
संसारिक रंगमंच हम जानते हैं।
दूसरों के लिए सहयोग करते हैं।
सच से हम सभी दूर भागते हैं।
अगर हम सच सब हम जानते हैं।
हमें भी यही राह पर चलना है।
आओ एक दूसरे को समझते हैं।
- नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उत्तर प्रदेश
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X