ख़ामोशी ..खामोशी, अब तो कुछ बोल,
चुप है क्यों, दिल के सारे राज खोल।
कब तक यूँ गुमसुम बैठी रहेगी,
आ बैठ मेरे संग, मन की गाँठें खोल।
खामोशी... खामोशी... अब तो कुछ बोल,
चुप है क्यों, दिल के सारे राज खोल।
मायूस चेहरा लिए बैठी है,
नज़रों में जाने कितनी बारिश समेटी है।
मन के कोने में दर्द छुपाए,
हर पल ख़ुद ही ख़ुद को समझा कर बोल
खामोशी... खामोशी... अब तो कुछ बोल,
चुप है क्यों, दिल के सारे राज खोल।
जब सुबह की किरणें दस्तक देंगी,
उम्मीद की राहें फिर से खिलेंगी।
कब तक यूँ दुख को सीने में घोलेगी,
एक दिन मुस्कानों से दुनिया तोल।
खामोशी... खामोशी... अब तो कुछ बोल,
चुप है क्यों, दिल के सारे राज खोल।
रो-रोकर आवाज़ भी थक गई है,
रूह जैसे रुई-सी हल्की हो गई है।
आँसू पोंछ, अब हौसला सँभाल,
जीवन में फिर खुशियों का बजा ढोल।
खामोशी... खामोशी... अब तो कुछ बोल,
चुप है क्यों, दिल के सारे राज खोल।
हर आँसू मोती बन जाएगा,
हर ज़ख्म एक दिन मुस्काएगा।
बीती रातों का अँधियारा छोड़,
उम्मीद की नई किरणों से नाता जोड़।
खामोशी... खामोशी... अब तो कुछ बोल,
चुप है क्यों, दिल के सारे राज खोल।
अँधेरे में यूँ खामोश पड़ी है,
जैसे फूलों की कोई बिखरी कड़ी है।
चाँद से रूठी-सी चाँदनी खड़ी है,
तेरे बिना हर राह अधूरी पड़ी है।
तू ही उसकी चाँदनी, वह तेरा चकोर,
खामोशी... खामोशी... अब तो कुछ बोल,
चुप है क्यों, दिल के सारे राज खोल।
रूठे लम्हों को अब जाने भी दे,
जीवन को फिर मुस्काने भी दे।
प्रेम की डोर है सबसे अनमोल।
खामोशी... खामोशी... अब तो कुछ बोल,
चुप है क्यों, दिल के सारे राज खोल।
दर्द को शब्दों का सहारा दे,
अपने मन को फिर उजियारा दे।
जो बीत गया उसे बीतने दे,
नई सुबह देगी जीवन अनमोल।
खामोशी... अब तो कुछ बोल,
चुप है क्यों, दिल के सारे राज खोल।
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