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खिलने की ज़िद

                
                                                         
                            अँधेरा कितना भी गहरा हो,
                                                                 
                            
खिलना मत छोड़ना—
तुम्हारे हिस्से की रोशनी
तुम्हें ढूँढ़ ही लेगी।

रास्तों पर चाहे रात
अपना पहरा बिठा दे,
हर मोड़ पर वक़्त
चाहे एक दीवार उठा दे।

याद रखना—
अँधेरा तुम्हारा रास्ता रोक सकता है,
तुम्हारे भीतर खिलते उजाले को नहीं।

कुछ फूल धूप के मोहताज नहीं होते,
वे अँधेरों में ही अपनी पहचान लिखते हैं;
और जिन्हें अपने भीतर के उजाले पर यक़ीन हो,
वे रात से नहीं—
रात उनके सवेरे से डरती है।
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8 घंटे पहले

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