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सूखा पेड़

                
                                                         
                            सूखा पेड़
                                                                 
                            

तुम्हारे जाने के बाद मैं उस सूखे पेड़-सा हो गया हूँ,
जो अब भी उसी रास्ते पर खड़ा है,
जहाँ कभी बसंत ठहरा करता था।

कभी मेरी शाखाओं पर तुम्हारी हँसी चिड़ियों की तरह उतरती थी,
आज वही शाखाएँ खामोशी का बोझ उठाए खड़ी हैं।

लोग कहते हैं—
"यह पेड़ अब किसी काम का नहीं,"
उन्हें क्या पता,
इसकी हर दरार में एक अधूरी मोहब्बत दफ़्न है।

बरसातें भी आईं, हवाएँ भी बदलीं,
मगर कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं
जो टूटने के बाद फिर हरे नहीं होते।

मैं आज भी जड़ों से उसी मिट्टी में बँधा हूँ,
जहाँ हमने कभी हमेशा साथ रहने का वादा किया था।

आज तुम्हारा जन्मदिन है...
दुआ है कि तुम्हारी ज़िंदगी में हर मौसम बसंत बनकर आए,
तुम्हारी मुस्कान कभी न मुरझाए,
और तुम्हें वह हर खुशी मिले
जिसकी तुमने कभी कल्पना की थी।

मैं तुम्हारी ज़िंदगी में अब शायद एक सूखे पेड़ की तरह ही रह गया हूँ,
जिसकी छाँव की ज़रूरत किसी को नहीं रही।
फिर भी दिल की गहराइयों से...

जन्मदिन मुबारक हो।

शायद किसी दिन यह सूखा पेड़ भी गिर जाएगा,
पर गिरने से पहले हवा से बस इतना कहेगा—

"जिसने मुझे कभी हरियाली दी थी,
उसे मेरी आख़िरी ख़ामोशी भी मुबारक...
और उसके हर जन्मदिन पर मेरी अनकही दुआएँ भी।"

 
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3 महीने पहले

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