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रुख (दिशा परिवर्तन)

                
                                                         
                            घनघोर घटाएं जो बरसने को थी
                                                                 
                            
हवा संग ले गई
प्यासी धरती तो प्यासी रही
समन्दर में बरसात हो गई
रुख बदल हवा ओझल हो गई
भटक गया बादल जमीं बंजर हो गई
एक आजाद पंछी घर छोड़ कर गया
ठिकाना तो मिला नहीं दर बदर हो गया
मैं पूछती हूं उससे भटकता क्यों है
अपने घर से बेघर होता क्यों है
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3 महीने पहले

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