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प्रेम (गज़ल)

                
                                                         
                            प्रेम को मारने शहंशाह चला तलबार से
                                                                 
                            
पर प्रेम कब मरा औजार से

कईयों को शूलि चढ़ा दिया उसने
सफल न हो सका तो खामोश कर दिया उसने

प्रेम कभी मरता नहीं जिंदा ही दफन होता है
लोगों ने समझा ही नहीं प्रेम क्या होता है

प्रेम प्रकाश पुंज ऊर्जा का उमंग तरंग लिये
मिलता है नसीब से जीवन के लिए
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3 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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