कुछ लोग अक्सर अवसर की तरह होते हैं
भुना लेते हैं -- जब जी चाहा उनका....
रिश्तों की आड़ में वो मतलब ही तलाशते हैं
ज़रूरत पड़े तो...अजनबी बन जाते हैं...
मतलब है तो शहद सी मीठी मीठी बातें करते हैं
मतलब निकलते ही वो मौसम की तरह बदल जाते हैं
वक़्त के साथ रिश्तों के भी मायने बदल जाते हैं
कभी जो अपने हुआ करते थे, वो भी पराए हो जाते हैं
वक़्त के साथ हर रोज़ चेहरे बदलते हैं लोग
जाने कैसे लोग इतने रंग बदल जाते हैं ...
- मीना गोपाल त्रिपाठी
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