हाथ से छूट गई भारी सी बाल्टी
उन्हें इतने बोझे की आदत नहीं
हालातों ने बच्चा माना कहाँ उसे
ये नन्हे हाथों को किसी ने सिखाया नहीं
वो ख़ुश हैं छालों के साथ भी
हाथों में सुबहा बोझ था तो शाम को फटी सी किताब भी
माद्दा है उनमें हालातों से लड़ने का
कल को आज से बेहतर करने का
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