वक़्त की आँधियों में भी मेरा वजूद बाकी है,
टूटकर भी खड़ा हूँ, यही मेरा सुकून बाकी है।।
हर किसी ने मुझे अपनी नज़र से ही परखा है,
मेरे किरदार में लेकिन अभी जुनून बाकी है।।
ज़ख़्म कितने मिले, मुस्कुराहट नहीं खोई मैंने,
मेरी आँखों में जीने का अब भी फ़सून बाकी है।।
राह में ठोकरों ने मुझे और सँवारा है हरदम,
मेरे हौसलों का तो अभी आसमाँ बाकी है ।।
लोग तो मिटाने चले थे मेरी हर एक पहचान,
मेरे लफ़्ज़ों में फिर भी मेरा वजूद बाकी है।।
मैंने सच बोलने की सज़ा उम्र भर पाई मगर,
मेरी आवाज़ में आज भी वही सुकून बाकी है।।
कवि एमके सिंह' झुकना नहीं फ़ितरत में कभी,
सर भले झुक जाए, मगर अपना वजूद बाकी है।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X