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तेरी परछाई से अब भी मेरा..

                
                                                         
                            तेरी परछाईं से अब भी मेरा रिश्ता निकला,
                                                                 
                            
धूप ढलते ही दर्दे दिल का फ़रिश्ता निकला।।

तेरी यादों ने ही मेरे दिल को उजाला बख़्शा,
हर अँधेरे में वही चाँद - सा चेहरा निकला।।

जिसे समझा था सफ़र का कोई आख़िरी मोड़,
वो तेरे इश्क़ का फिर एक दरिया निकला।।

दिल ने हर ज़ख़्म को ख़ामोश दुआ में बदला,
मेरे होंठ जब भी हिले, तेरा ही किस्सा निकला।।

लोग कहते रहे मुझे, किस्मत ने तुझे छोड़ दिया,
मैंने देखा तो हर इक मोड़ पे साया निकला।।

तेरे जाने से भले ही, सूना हुआ है ये जहाँ,
मेरी ग़ज़लों में मगर तेरा ही जलवा निकला।।

अब भी एहसास की ख़ुशबू में तू शामिल है कहीं,
हर गली , हर दरीचे से तेरा ही रस्ता निकला।।

कवि एमके सिंह' ने वफ़ा लिख दी लहू की स्याही से,
दाद महफ़िल की मिली , नाम भी ज़िंदा निकला।।
- एम के सिंह
 
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2 महीने पहले

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