आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

रिश्तों की पवित्रता में..

                
                                                         
                            मेरे मोहब्बत भरे जीवन में ज़हर न घोलो ,
                                                                 
                            
रिश्तों की पवित्रता में नफ़रत के रंग न घोलो।।

जो अपने हैं उन्हें सदा अपना ही रहने देना,
हर बात - बात में फ़ासलों का सफ़र न घोलो।।

लबों पर हो अगर शिकवा तो तहज़ीब भी रखना,
बातों के दरिया में कभी तुम तल्ख़ असर न घोलो।।

ये दिल तो काँच सा होता है, संभल कर रखना,
हँसते मुस्कराते हुए मेरे चेहरों में दर्द भर न घोलो।।

मिले हों प्यार से जो भी लोग इस सफ़र में तुम्हें,
उनकी वफ़ाओं में आज बेवजह कहर न घोलो।।

प्यार मोहब्बत से ही महकता है गुलशन-ए-जीवन,
इस खिलते हुए हरियाली मौसम में पतझर न घोलो।।

अगर बाँटना ही है तोअपनी अकीदत भरी दुआएँ बाँटो,
आज तुम अपनों की साँसों में कोई डर न घोलो।।

ये ज़िंदगी तो मात्र चार दिनों की मुस्कुराहट ही है,
आज यूँ ही मोहब्बत भरे जीवन में ज़हर न घोलो।।
- एम के सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर