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नया इतिहास कर गए

                
                                                         
                            तोड़कर हर मिथक, नया इतिहास कर गए,
                                                                 
                            
जनता के विश्वास का एहसास कर गए।।

डंडे का हर ज़ोर,और सत्ता का शोर थम गया,
मत की ताक़त का सबको अहसास कर गए।।

जो समझते थे कि जनता ख़ामोश रहेगी,
वो जानता जनमत का नया आग़ाज़ कर गए।।

बाँकीपुर की धरती ने आज साफ़ कह दिया,
सच के हक़ में खुलकर के आवाज़ कर गए।।

झूठ पर बने हुए महलों की बुनियाद हिल गई,
जनमानस सच्चाई को फिर से सरताज कर गए।।

प्रशांत किशोर बढ़े तो,अपनी उम्मीदें भी बढ़ीं,
हर दिल में बदलाव का ये अंदाज़ को भर गए।।

'कवि एमके सिंह' लिखे कलम से बस यही,
जन सेवा का पथ सदा के लिए हमराज़ कर गए।।
 
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2 महीने पहले

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