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मुझे नाज है अपनी मोहब्बत पर

                
                                                         
                            मुझे नाज़ है अपनी मोहब्बत पर, ये सौदा सस्ता नहीं,
                                                                 
                            
दिल देकर भी मुस्कुराना हर किसी के बस का नहीं।।

तेरे नाम की रौशनी से मेरी हर शाम सँवरती है,
ये इश्क़ कोई अफ़साना नहीं, य़ह रूह की बंदगी है।।

वफ़ाओं के सफ़र में हमने काँटे भी हँसकर चूमे,
हर ज़ख्म बता रहा है , ये रास्ता कोई धोखा नहीं।।

जिसे चाहा मैंने उसे इज़्ज़त दी, दुआओँ में ही रखा,
मेरा प्यार कभी भी हवस का कोई चेहरा नहीं।।

वक़्त बदला, लोग बदले, मौसम ने भी रंग बदले,
मगर मेरा दिल अपनी चाहत से कभी बदला नहीं।।

तेरे होने से ही मेरी साँसों का मक़सद महका ,
ये रिश्ता किसी दौलत का मोहताज कभी रहा नहीं।।

'एमके सिंह' फ़ख्र से कहते हैं महफ़िल के बीच आज,
मुझे नाज़ है अपनी मोहब्बत पर, ये ताज झुकता नहीं।।
 
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2 महीने पहले

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