दिलशाद हो गया है ये दिल तेरे प्यार में,
हर ग़म भी मुस्कुरा उठा तेरे दीदार में।।
हर ज़ख्म को सुकून की दौलत-सी मिल गई,
कुछ तो असर ज़रूर है तेरे किरदार में ।।
वीरान दिल की बस्तियाँ भी गुलज़ार हो गईं,
अब तक मिली है छाँव तेरे ही इंतज़ार में।।
रंजो - अलम की धूप भी ठंडी-सी लग गई,
रहमत भी उतर पड़े मेरे दर पे तेरे इक़रार में।।
आज नफरत के इस जहाँ में मोहब्बत का दीप हो,
यही तो असल में जीत है हर एक हार में ।।
दौलत से बढ़कर आज भी रिश्तों का मान है,
रौनक़ छिपी हुई है अपनों के सच्चे व्यवहार में।।
जो दर्द बाँटता रहा सदा , वही दिलशाद हो गया,
इंसान की यही महानता है बस इसी विचार में।।
'एम के सिंह' रखो सदा अदब, वफ़ा और सादगी,
जीने का सारा फ़लसफ़ा है इन्हीं उसूलों के सार में।।
- एम के सिंह
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