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दिल का दर्द

                
                                                         
                            दिल का दर्द मेरी रूह का अफ़साना बन गया,
                                                                 
                            
हर अश्क़ मेरी आँख का पैमाना बन गया।।

जिसको सजाया था दुआओँ में उम्र भर हमने,
वही शख़्स आज मेरे ग़म का बहाना बन गया।।

चाहा था जिसे फूल -सा महके मेरी दुनिया में,
वो ख़ार बनके हर सफ़र का वीराना बन गया।।

हमने तो वफ़ाओं की इबादत ही सदा की थी,
क्यों प्यार ही हर बार हमें तन्हा बना गया।।

अब कौन बताएगा मुकद्दर की हक़ीक़त को,
जो अपना था वही सबसे बेगाना बन गया।।

महफ़िल में हँसी बाँटता फिरता हूँ मुस्कुराकर,
अंदर का हर एक ज़ख्म फ़साना बन गया।।

अब भी तेरी यादों का धुआँ दिल से उठता है,
बुझता हुआ चराग़ भी परवाना बन गया ।।

हर दर्द को सीने में छुपाकर जो जिया हमने,
वो दर्द ही मेरे जीने का ख़ज़ाना बन गया ।।

कवि एमके सिंह'लहू से जो लिखी दिल की कहानी,
हर शेर आज सुनने वालों का तराना बन गया।।
 
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2 महीने पहले

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