जहन में तेरी याद का उजाला सँभाल रखा,
हर एक दर्द को हमने ग़ज़ल में ढाल रखा।।
नज़र ने देख ली दुनिया की सारी बेरुख़ी,
मगर दिलों में वफ़ा का कमाल सँभाल रखा।।
हवा ने लाख बुझाने की कोशिशें कीं मगर,
चराग़ - ए - इश्क़ को हमने सँभाल रखा।।
जहन में शोर बहुत था, सुकून कम निकला,
तेरे ख़याल ने ही दिल का ख़याल रखा।।
न कोई ताज मिला, न कोई शोहरत ही मिली,
ज़मीर अपनी बेच न पाए, ये मलाल रखा।।
जो लोग वक्त के संग अपने रंग बदलते रहे,
हमने हर हाल में अपना जमाल रखा ।।
दुआ यही है कि महके मोहब्बतों का चमन,
हर एक दिल में इंसानियत का ख़याल रखा।।
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