वो मर गया पर मत कहना मुरदा है!
उसकी सांसों में तेरी खुशबू जिंदा है!
तन्हाई, रुसवाई, ये कातिल क्या जाने,
जिनकी आंखों पर नफरत का परदा है!
प्रेम के पंछी तो सिर्फ उड़ना जानते हैं
पर कुतर देना तो जमाने की अदा है!
प्रेमी का कोई जाति धर्म नहीं होता
ये मानव के कुंठित मन की सदा है!
"केशव"ने "सुभद्रा","अर्जुन" को सौंप दी,
फिर क्यूं ये समाज,अब भी मुरदा है!!
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