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तुम चले गये

                
                                                         
                            तुम चले गये, तो,अब बचा क्या है!
                                                                 
                            
जो बच भी गया,उसमें रखा क्या है!

लाया करती थी, खुशबू तुम्हारी, मेरी सांसों तक,
कोई तो बताए,उन हवाओं का,अता -पता क्या है!

जगा करते कभी, तुम्हारी यादों की अंगड़ाई लेकर,
तुम्हारे बिना,ढलती शामों का,अब तो खता क्या है!

दिल को अब भी ऐतबार ही नहीं तुम्हारे जाने का,
किस्सा जो खतम होता नहीं,अब वो किस्सा क्या है!

खुदा करे कि तुम्हारे आने की कोई सूरत बन जाय,
फिर हम तुम्हीं से पूछें कि आखिर ये माजरा क्या है!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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