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तेरी आंखों में

                
                                                         
                            तेरी आंखों में बहारों का पूरा मौसम है,
                                                                 
                            
मेरी सांसों में भीगने का पूरा दम-खम है,
कह दो सावन से तेरी मर्जी हो तभी आना,
अभी तो प्रेम -फुहारों का पूरा मौसम है।।

सफर में तुम रहो तो रास्ते सुहाने हैं
बिना तुम्हारे हम तो खुद से ही बेगाने हैं,
तुम्ही से खिलती मेरी जिंदगी के अफसाने,
कदम- कदम पर मेरी राह में तराने हैं।।

बांटने वाले के दिल से मोहब्बत कम नहीं होती,
आंधियों से चराग -ए- चाहत खतम नहीं होती,
कौन कहता है, वो मरकर लाश में दफन हो गया,
खुशबू -ए-गुल-ए - इंसानियत खतम नहीं होती।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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