हाथी, घोड़े, तोप, तलवार, फ़ौज तो तेरी सारी है,
पर चुप रहने की शक्ति मेरी, अब सब पर भारी है।
शोर मचाकर टूट जाएगी इक दिन यह मग़रूर सियासत,
मेरा ये ख़ामोश सब्र ही तेरी महफ़िल उठने की तैयारी है।
बहुत कर ली सियासत तुमने झूठे इल्ज़ाम लगाने की,
अब ठान ली है हमने भी तुम्हें आईना दिखाने की।
ये बेबुनियाद शोर तुम्हारा महज़ एक साज़िश है,
बंद करो ये तमाशा अब देश को भड़काने की।
चुप रहकर भी हमने हर एक सच को सँभाला है,
तुम्हारी हर एक साज़िश का मुखौटा उतरने वाला है।
थाम लो अपने इस विरोध के बेक़ाबू तूफ़ान को,
क्योंकि जनता ने अब विकास और स्थिरता को सँभाला है।
मनगढ़ंत आरोपों से तुम सच को बदल नहीं पाओगे,
जनता के इस अटूट भरोसे को तुम हिला नहीं पाओगे।
रोक दो यह फ़िज़ूल का विरोध और नकारात्मकता,
काम बोलता है हमारा, तुम शोर से हमें झुका नहीं पाओगे।
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