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सबके दिलों में आग लगी है

                
                                                         
                            सबके दिलों में आग लगी है
                                                                 
                            
जंतर-मंतर धुआं -धुआं है
ठंडी हवाएं लेकर आए
दिल्ली के ये लोग कहां है।

बूझी राख के ढेरों में
दबी हुई चिंगारी थी
अग्नि लपटें बन चलीं हैं
आने वाला कोई तूफां है।

परिवर्तन की चाह में
जाग उठी तरूणाई है
जहां कदम है जवां -जवां
खुली निगाहें वहां वहां है।

झुठला नहीं कोई सकता
युवा शक्ति की क्षमता को
मुखर होती जब इन्क्लाब
थर्राता फिर आसमां है।

संसद से जब न्याय न निकले
सड़कों पर अन्याय दिखेगा
दिल जलेंगे तो मौसम भी जलेगा
युवा दिलों का ये कारवां है।।
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2 महीने पहले

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