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तुम्हें अभी तक पता नहीं है। चमन चमन को रंगाने वाले

                
                                                         
                            ऐ उड़ने वाले गगन के पंछी
                                                                 
                            
दिशा दिशाएं बता रही है
जमीं ही होगी तुम्हारी मंजिल
तुम्हें अभी तक पता नहीं है।

अति अनंत है गगन सीमाएं
तू अपनी पंखों पे न घमंड कर
बिखर जाएंगी अहम के पंखें
तुम्हें अभी तक पता नहीं है।

चमन चमन को रंगाने वाले
सुमन, सुगंधी फैलाने वाले
वजूद अपना बचा न सकते
तुम्हें अभी तक पता नहीं है।

जगत को जीता बना सिकंदर
उमर जवानी में प्राण त्यागा
भुजा की ताकत काम न आया
तुम्हें अभी तक पता नहीं है।

जो अपने दम पर बहुत कमाया
नहीं बनेंगे वो तेरा साया
मिलेगी सबको दो गज की मिट्टी
तुम्हें अभी तक पता नहीं है।
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एक महीने पहले

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