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दिलजले जुटाते हैं ख़ुद भीतरी गरमाहट

                
                                                         
                            यूं तो मेरी जिंदगी में कोई कमी नहीं
                                                                 
                            
उसके बगैर जिंदगी पर जिंदगी नहीं।

मैं हूँ हवा में या कि धंसा पाताल में
चल रहा हूँ पैरों के नीचे जमीं नहीं।

बढ़ रहा हूँ जैसे पत्थर में उगे पीपल
दर्द है लबालब आँखों में नमीं नहीं।

मां बाप बेटी बेटा आंखों से हुए ओझल
है दिल ओ कशमकश पर दिलकशी नहीं।

ठंडी हवाएं बादल रिमझिम बौछार उनकी
बिजलियाँ जहाँ की सहने को हमीं नहीं।

दिलजले जुटाते हैं ख़ुद भीतरी गरमाहट
' दुआ ' का क्या क़सूर ग़र अग्नि जली नहीं।
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4 घंटे पहले

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