हर दर्द को आवाज़ मिले
ये मुमकिन नहीं
हर खामोशी सुनी जाए
ये जरूरी नहीं
कभी आँसू भी कह जातें हैं
दास्तांने दर्द भरी
गूँजती हैं शोर में खामोशी भी
कभी कभी ।
-मं शर्मा
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