नित नए नए शब्द गढ़ता रह गया
संदर्भ किसी ने समझा ही नहीं
अर्थ व्यवसाय में लिप्त सर्वजन
शिक्षा का मोल कोई समझा नहीं।
-मं शर्मा
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