ना पहले सा ऐतबार रहा अब
ना पहले से इतवार रहे
भागमभाग से भरे जीवन में
नित सुकून का अभाव खले
उपलब्धियों की चकाचौंध में
सब जन सत्य से भाग रहे
अपेक्षाओं की अमिट प्यास से
अपनों के व्यवहार हाँफ रहे।
-मं शर्मा
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