जब अभिलाषित अप्राप्य हो
घोर निराशा व्याप्त हो
अंतस के पटल खोल के
सब्र की बयार में श्वास ले
कष्टों का निवारण होगा
तृष्णा का निर्वाण होगा
सावन ने वादा किया है
पतझड़ हीन जीवन देगा।
- मं शर्मा( रज़ा)
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