गहन खामोशी थी
कुछ सुनने न दिया
अंतस का कोहराम
कम होने न दिया
कान टकटकी लगाए
मुस्तैद खड़े रहे
खामोशी अपनी आवाज़
तलाशती रह गई ।
-मं शर्मा
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