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आडंबर

                
                                                         
                            आडंबरों की झूठी रवायत
                                                                 
                            
ढो रहा है आदमी

नफरत के फूल खिलाती धरती
जोत रहा है आदमी

अपनी बर्बादी की इबारत
खुद लिख रहा है आदमी ।
-मं शर्मा 
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4 घंटे पहले

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