आडंबरों की झूठी रवायत
ढो रहा है आदमी
नफरत के फूल खिलाती धरती
जोत रहा है आदमी
अपनी बर्बादी की इबारत
खुद लिख रहा है आदमी ।
-मं शर्मा
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